कर्नाटक का धर्मस्थल हत्या कांड एक बार फिर सुर्खियों में है, और इस बार वजह है मामले की जांच कर रही SIT टीम के प्रमुख का ट्रांसफर और एक रहस्यमयी व्हिसलब्लोअर की गवाही, जिसने इस बहुचर्चित बलात्कार और हत्या केस में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
SIT प्रमुख प्रणब मोहंती का ट्रांसफर – जांच पर उठे सवाल
विशेष जांच टीम (SIT) का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी प्रणब मोहंती का तबादला कर उन्हें केंद्रीय प्रतिनियुक्ति (Central Deputation) पर भेज दिया गया है। जब धर्मस्थल मंदिर मामला बेहद संवेदनशील मोड़ पर है, उस वक्त SIT प्रमुख की हटाई से लोगों के मन में कई शंकाएं जन्म ले रही हैं।
काले कपड़े में सामने आया गवाह – कौन है यह व्हिसलब्लोअर?
इस पूरे मामले में नया मोड़ तब आया जब एक नकाबपोश व्हिसलब्लोअर ने पुलिस और SIT को उन जगहों पर ले जाकर चौंका दिया जहां उसका दावा है कि दो दशकों तक सैकड़ों महिलाओं की लाशें दफनाई या जलाई गईं। उसका पहनावा—ब्लैक जैकेट, ढका हुआ चेहरा और सिर—इसकी पहचान को रहस्य बना देता है।
मंजूनाथ मंदिर में 20 साल तक सफाईकर्मी रहा गवाह
व्हिसलब्लोअर कोई बाहरी व्यक्ति नहीं, बल्कि वह धर्मस्थल के मंजूनाथ मंदिर में 20 वर्षों तक सफाईकर्मी के रूप में काम कर चुका है। उसका आरोप है कि 1995 से 2014 के बीच, उसे मंदिर प्रशासन से जुड़े प्रभावशाली लोगों के निर्देश पर बलात्कार के बाद मारी गई महिलाओं की लाशें छिपाने के लिए मजबूर किया गया।
रोंगटे खड़े कर देने वाली गवाही
गवाह के मुताबिक, उसने खुद 2010 में एक स्कूली यूनिफॉर्म पहने लड़की की लाश, जिसके अंडरगारमेंट्स गायब थे, पेट्रोल पंप के पास दफनाई थी। एक महिला की लाश को तेजाब से जलाया गया और अखबार में लपेटा गया। इन घटनाओं का उल्लेख उसने 3 जून 2024 को पुलिस को सौंपी गई चिट्ठी में किया।
10 साल तक छिपता रहा – 2024 में लौटकर उजागर की सच्चाई
2014 में जब उसके परिवार की एक लड़की के साथ भी दुष्कर्म हुआ, तब वह डर के कारण धर्मस्थल छोड़कर फरार हो गया। लगभग 10 साल बाद, अपराधबोध से ग्रसित होकर वह वापस लौटा और उसने बलात्कार और हत्या केस में चौंकाने वाले सबूत जुटाए। उसने खुद कंकालों को खोदकर तस्वीरें लीं और अपने आधार कार्ड व कर्मचारी पहचान पत्र के साथ पुलिस को सौंपे।
जान का खतरा – सीलबंद लिफाफा सुप्रीम कोर्ट वकील को सौंपा
व्हिसलब्लोअर को अपनी जान को खतरा बताया गया है। इसी कारण, उसके वकील ने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता केवी धनंजय को एक सीलबंद लिफाफा सौंपा है, जिसमें उन लोगों के नाम हैं जो कथित रूप से इस अपराध के पीछे हैं। यह लिफाफा तभी खोला जाएगा जब उसे या उसके परिवार को नुकसान पहुंचता है।
निष्कर्ष: क्या धर्मस्थल हत्याकांड को मिलेगा इंसाफ?
जब एक सामूहिक हत्या मामला गहराई से जांच की मांग कर रहा हो, तब SIT प्रमुख का ट्रांसफर और एक साहसी गवाह की सुरक्षा का मुद्दा कई सवाल उठाता है। क्या कर्नाटक बलात्कार मामला दबा दिया जाएगा या इस बार सच्चाई सामने आकर न्याय की जीत होगी?
